
12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI‑171 हादसे का शिकार हुई। इस हादसे में 241 लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए। यह पिछले दस सालों में भारत में हुआ सबसे गंभीर विमान हादसा बन गया। हादसे के बाद भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जांच शुरू की, जिसमें अमेरिका की FAA, NTSB, ब्रिटेन की AAIB‑UK और विमान निर्माता बोइंग की टीमें भी शामिल हुईं।
अब इस पूरे मामले में UN की संस्था ICAO (इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह जांच में एक पर्यवेक्षक (observer) के रूप में ICAO को शामिल होने दे। सवाल यह उठता है कि ICAO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था इस जांच में क्यों शामिल होना चाहती है?
ICAO विमानन सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक संस्था है, जो विश्व भर में विमान हादसों की जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। ICAO का मानना है कि जब किसी बड़े विमान हादसे में अंतरराष्ट्रीय पक्ष जुड़े होते हैं — जैसे कि विदेशी नागरिक, विदेशी विमान निर्माता या विदेशी रूट — तो वहां जांच में सभी संबद्ध पक्षों की भागीदारी ज़रूरी होती है।
ICAO के दिशा-निर्देश Annex‑13 के तहत ऐसे मामलों में सभी पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष, तकनीकी और सार्वजनिक विश्वास के अनुरूप हो।
भारत ने फिलहाल ICAO की इस मांग को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत हो रही है। भारत सरकार ने पहले ही अमेरिकी और ब्रिटिश जांच एजेंसियों के विशेषज्ञों को शामिल किया है और ब्लैक बॉक्स डेटा की भी नई दिल्ली स्थित AAIB लैब में सफलतापूर्वक जांच की जा रही है।
सरकार का रुख साफ है: जांच का नेतृत्व भारत की संस्था AAIB ही करेगी। हालांकि, तकनीकी सहयोग के लिए किसी भी संस्था की सहायता ली जा सकती है, बशर्ते जांच की गोपनीयता और संप्रभुता प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि ICAO की जांच में भागीदारी से पारदर्शिता बढ़ेगी और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को और मजबूत करेगी। इसके अलावा, ICAO की उपस्थिति यह भी सुनिश्चित करती है कि पीड़ित परिवारों को सही और तथ्यात्मक रिपोर्ट मिले, जिसमें कोई पक्षपात या संदेह की गुंजाइश न हो।
फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि 30 दिनों के भीतर एक प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ जाएगी, जिसमें दुर्घटना के कारणों की शुरुआती झलक दी जाएगी। अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है, लेकिन इससे यह तय होगा कि तकनीकी गड़बड़ी, पायलट त्रुटि या कोई अन्य कारण इस बड़े हादसे के लिए ज़िम्मेदार था।