
ब्रिटेन ने एक बार फिर अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जानकारी के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम अमेरिका से ऐसे अत्याधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स खरीदने जा रहा है जो परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखते हैं। यह डील सिर्फ एक रक्षा समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है। इस सौदे के बाद ब्रिटेन की वायुसेना न केवल ज्यादा शक्तिशाली होगी, बल्कि NATO की सैन्य क्षमताएं भी और अधिक मजबूत हो जाएंगी।
F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित किया गया है। यह जेट अपनी स्टील्थ तकनीक के लिए जाना जाता है, जो उसे दुश्मन के रडार से बचाकर लक्ष्य पर सीधा हमला करने की क्षमता देता है। यह विमान बेहद तेज गति से उड़ सकता है और हवा से हवा तथा हवा से जमीन पर हमले के लिए उपयुक्त हथियारों से लैस होता है। अब जब इसमें B61-12 जैसे न्यूक्लियर बम भी शामिल किए जाएंगे, तो इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। B61-12 एक आधुनिकीकृत परमाणु बम है जिसे बेहद सटीक निशाना साधने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके इस्तेमाल से पारंपरिक जंगों की परिभाषा ही बदल सकती है।
ब्रिटेन का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक स्तर पर सामरिक तनाव अपने चरम पर है। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान विवाद और ईरान से जुड़ी क्षेत्रीय टकराव की स्थितियों ने पश्चिमी देशों को और अधिक एकजुट और सतर्क बना दिया है। NATO, जो अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों का सैन्य गठबंधन है, अब न सिर्फ अपने सदस्यों की सुरक्षा के लिए बल्कि पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अधिक तैयार दिख रहा है। ब्रिटेन के इस निर्णय को भी उसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
यह बात ध्यान देने योग्य है कि ब्रिटेन के पास पहले से ही सामरिक स्तर पर परमाणु हथियारों से लैस ट्राइडेंट मिसाइल सिस्टम है, जो पनडुब्बियों के माध्यम से संचालित होता है। लेकिन अब यह पहली बार होगा जब ब्रिटेन की वायुसेना के पास भी परमाणु हमले की पूरी क्षमता होगी। इससे दुश्मन देशों के खिलाफ हवाई हमला करने की रणनीति और अधिक शक्तिशाली बन जाएगी। यह सिर्फ सामरिक शक्ति का विस्तार नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी देश किसी भी तरह के खतरे का जवाब देने में सक्षम हैं।
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये जेट्स सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही परमाणु हथियारों से लैस किए जाएंगे। लेकिन इससे एक बात तो तय है कि NATO की रणनीति अब ‘Defensive’ से ‘Deterrent’ की तरफ आगे बढ़ रही है — यानि अब सिर्फ हमला झेलने के लिए नहीं, बल्कि पहले से विरोधी को मानसिक रूप से रोकने की दिशा में कार्य हो रहा है।
इस सौदे से रूस और चीन की चिंताएं भी बढ़ेंगी। रूस पहले ही NATO के विस्तार को लेकर नाराजगी जता चुका है और यूक्रेन युद्ध इसी कारण से शुरू हुआ था। वहीं चीन भी ताइवान पर पश्चिमी देशों के समर्थन से असहज महसूस करता है। ऐसे में ब्रिटेन द्वारा परमाणु-सक्षम स्टील्थ जेट्स खरीदना एशिया और यूरोप दोनों में भू-राजनीतिक असंतुलन को गहराने वाला कदम हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह कदम एक बड़ा साइकोलॉजिकल मूव है — जिससे यह दिखाया जा सके कि पश्चिमी देश अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पास पूरी तरह से आधुनिक हथियार प्रणाली है और वे किसी भी स्तर की चुनौती का सामना कर सकते हैं। इस निर्णय से यूरोपीय देशों में यह संदेश भी जाएगा कि ब्रिटेन युद्ध-स्तर पर अपने रक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है, जिससे छोटे देश भी प्रेरणा ले सकते हैं।
कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि ब्रिटेन का अमेरिका से परमाणु हथियारों से लैस F-35 स्टील्थ जेट खरीदना सिर्फ एक सौदा नहीं, बल्कि एक भविष्य की सैन्य नीति का हिस्सा है। यह फैसला दिखाता है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर हथियारों की दौड़ और सैन्य तैयारियों में और तेजी आने वाली है। NATO की शक्ति को यह सौदा नया आयाम देगा और दुनिया की दो बड़ी धुरी — पश्चिम और पूर्व — के बीच शक्ति संतुलन की लड़ाई और तीव्र हो सकती है।