
द्वारका एक्सप्रेसवे: दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों का सालों पुराना इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 अगस्त, रविवार को देश को एक बड़ी सौगात देने वाले हैं। वे इस दिन न केवल द्वारका एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे बल्कि अर्बन एक्सटेंशन रोड 2 को भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। दोनों प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र के ट्रैफिक सिस्टम और कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने वाले हैं।
दिल्ली-एनसीआर के लिए बड़ी राहत
अब तक दिल्ली से गुरुग्राम या एयरपोर्ट की यात्रा करना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। एनएच-48 पर जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुका था। लेकिन द्वारका एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यह देश का पहला 8-लेन वाला एलीवेटेड एक्सप्रेसवे है, जो इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने के समय को काफी कम कर देगा।
गुरुग्राम से आने वाले लोग अब मुश्किल से 10 मिनट में एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। वहीं, जो लोग पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से दिल्ली एयरपोर्ट आते हैं, उन्हें अब पहले की तरह घंटों ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा। नए एक्सप्रेसवे के जरिए वे 20 मिनट से भी कम समय में एयरपोर्ट तक पहुंच जाएंगे।
सफर होगा बेहद आसान
सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के अन्य इलाकों की कनेक्टिविटी भी इस एक्सप्रेसवे से सुधर जाएगी। धौला कुआं से गुरुग्राम की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी ट्रैफिक से जूझना पड़ता था। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद यहां भी भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी।
दूसरी ओर, अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 का भी समान महत्व है। इसके शुरू होने से सोनीपत और पानीपत जैसे शहर दिल्ली से और नजदीक हो जाएंगे। जहां अभी लोगों को लगभग एक घंटे का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी एक घंटे से भी कम में तय की जा सकेगी।
इंजीनियरिंग का शानदार नमूना
द्वारका एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है। इसकी कुल लंबाई लगभग 29 किलोमीटर है और चौड़ाई करीब 34 मीटर है। इसका बड़ा हिस्सा हरियाणा से होकर गुजरता है, जबकि कुछ हिस्सा दिल्ली में पड़ता है।
निर्माण कार्य में करीब 20 लाख मीट्रिक टन स्टील और 20 लाख क्यूबिक मीटर सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है। इतनी भारी मात्रा में संसाधन उपयोग करने की वजह से इसे दुनिया के सबसे मजबूत एक्सप्रेसवे में गिना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 9,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
सिर्फ सड़क नहीं, मिलेगा और भी बहुत कुछ
द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ देश को अपनी सबसे बड़ी सुरंग (टनेल) भी मिलने जा रही है। इसके अलावा कई अंडरपास, फ्लाईओवर और अन्य आधुनिक सुविधाएं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में न सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा आसान होगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की स्थानीय कनेक्टिविटी भी एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी।
आर्थिक और सामाजिक फायदा
इस एक्सप्रेसवे का लाभ केवल यात्रियों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। कम समय में सफर पूरा होने से ईंधन की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और बिजनेस हब जैसे गुरुग्राम और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे रोजगार और व्यापार दोनों को नई रफ्तार मिलेगी।
लोगों की उम्मीदें
द्वारका एक्सप्रेसवे लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। लाखों लोग इसके शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अब जब यह सपना पूरा होने जा रहा है, तो लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। दिल्ली और हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के यात्रियों को इसका फायदा मिलेगा।