
मणिपुर का चुराचांदपुर जिला एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया जब रविवार (30 जून 2025) को अज्ञात हमलावरों ने दिनदहाड़े एक वाहन को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में एक बुजुर्ग महिला भी शामिल है। यह घटना मोंगजंग गांव के पास हुई, जो पहले से ही तनावग्रस्त क्षेत्रों में गिना जाता है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, सभी पीड़ित एक वाहन में यात्रा कर रहे थे जब अज्ञात बंदूकधारियों ने वाहन को रोका और बिना किसी चेतावनी के गोलीबारी शुरू कर दी। हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है और न ही यह स्पष्ट हो पाया है कि हमले का उद्देश्य क्या था। स्थानीय सूत्रों का मानना है कि यह घटना जातीय हिंसा का हिस्सा हो सकती है, हालांकि पुलिस ने इस बारे में फिलहाल कुछ भी तय नहीं कहा है।
घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बल हरकत में आ गए और भारी संख्या में सशस्त्र जवानों को इलाके में भेजा गया। पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। वाहन को जब्त कर लिया गया है और फॉरेंसिक जांच जारी है। वहीं, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
इलाके में इस गोलीबारी के बाद दहशत का माहौल फैल गया है। ग्रामीण अपने घरों में बंद हैं और चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। चुराचांदपुर और आसपास के इलाकों में एहतियातन सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सीमाओं पर चेकपोस्ट बढ़ा दिए गए हैं। राज्य सरकार ने हालात पर नियंत्रण रखने के लिए उच्च अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर पहले ही बीते एक साल से जातीय टकराव, कर्फ्यू, इंटरनेट बैन और कई हिंसक घटनाओं से जूझ रहा है। कुकी और मेइतेई समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है और इसने राज्य को संवेदनशील बना दिया है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद, शांति बहाल होने के संकेत अभी तक साफ नहीं दिखाई दे रहे।
स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने घटना की निंदा की है और सरकार से मांग की है कि अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का सहयोग करें।
हालांकि अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे मणिपुर में लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा से जोड़कर देख रही हैं।