
Real vs Fake Apples: आजकल बाजार में मिलने वाले सेब भले ही देखने में बेहद चमकदार और खूबसूरत लगते हों, लेकिन जरूरी नहीं कि वे पूरी तरह प्राकृतिक हों। बहुत से विक्रेता सेब की बाहरी चमक बढ़ाने के लिए उन पर मोम या केमिकल की परत चढ़ा देते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। ऐसे में असली और नकली सेब की पहचान करना बेहद जरूरी हो जाता है।
सेब वैसे तो सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यदि उस पर कृत्रिम चमक या मोम की परत हो, तो यह फायदे की जगह नुकसान दे सकता है। यह मोम पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है और इससे पेट दर्द, उल्टी, गैस और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Real vs Fake Apples कैसे करें असली और नकली सेब की पहचान?
जब भी आप बाजार से सेब लेकर आएं, तो सबसे पहले उसे हल्के गर्म पानी में कुछ मिनट के लिए डाल दें। अगर सेब की सतह से चिकनाई या परत उतरती दिखे, तो यह साफ संकेत है कि उस पर मोम चढ़ाया गया है।
दूसरा तरीका है – सेब को चाकू से हल्का सा खुरचकर देखना। अगर ऊपर से कोई सफेद या पारदर्शी लेयर निकलती है, तो समझिए यह प्राकृतिक नहीं है। यह परत शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
इसके अलावा, सेब की चमक पर भी ध्यान दें। जो सेब देखने में अत्यधिक चमकदार होता है, वो असली कम और ‘सजाया हुआ’ ज़्यादा होता है। असली सेब की चमक हल्की और प्राकृतिक होती है, जबकि नकली वाले पर केमिकल या मोम की परत से अतिरिक्त चमक आती है।
सेहत से न करें समझौता
कृत्रिम मोम या केमिकल से कोट किया गया सेब शरीर में पहुंचकर नुकसान कर सकता है। इससे गैस्ट्रिक दिक्कतें, एलर्जी या पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप खरीदने से पहले सेब की जांच करें और अगर संभव हो तो ऑर्गेनिक या लोकल किसान द्वारा उगाए गए फल ही लें।