
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में मानव के सामने आने वाली “सबसे बड़ी चुनौती” का जिक्र किया है। शुभांशु शुक्ला, जो वर्तमान में इसरो के साथ मिलकर मानवयुक्त अंतरिक्ष यान “गगनयान” मिशन की तैयारी में जुटे हैं, ने बात करते हुए बताया कि मौजूदा तकनीक और प्रशिक्षण के बावजूद पृथ्वी से दूर मानव शरीर को सबसे अधिक “तापमान और विकिरण” से मुकाबला करना पड़ता है।
शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शुक्ला और पीएम मोदी के बीच लगभग 15 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान मोदी ने शुभांशु से पूछा कि जब कोई अंतरिक्ष यात्री चंद्रयान या गगनयान में बैठकर पृथ्वी की कक्षा पार करता है, तो उसे सबसे ज्यादा किस समस्या का सामना करना पड़ता है? शुभांशु ने जवाब दिया:
“प्रधानमंत्री जी, हमने पहले भी अंतरिक्ष में इंसान भेजने के प्रयास देखे हैं, लेकिन अंतरिक्ष की खतरनाक परिस्थितियां—खासकर एक्सट्रीम तापमान और उंची विकिरण—इनसे बचना सबसे बड़ी चुनौती है। शून्य गुरुत्वाकर्षण के अलावा, तापमान डेढ़ सौ डिग्री सेल्सियस से लेकर माइनस सौ डिग्री तक जाता है, और संपूर्ण कक्षा में अंतरिक्षीय विकिरण भी मनुष्य के सेलुलर सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।”
शुक्ला ने आगे बताया कि इंसान के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष यान में थर्मल कंट्रोल सिस्टम और विकिरण शील्डिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा, गगनयान मिशन में भारतीय वैज्ञानिक एक “मल्टी-लेयरेड प्रोटेक्शन” तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो तापमान नियंत्रण प्लाटफॉर्म के साथ-साथ विकिरण रोधी ऐलो और कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल करती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस चुनौती पर चर्चा करते हुए कहा, “आपके अनुभव और आपकी टिप्पणियां हमारी अगली योजनाओं के लिए बहुत मायने रखती हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे अंतरिक्ष यान में बैठे कैप्सूल में बैठे हमारे सहयोद्धा पूरी तरह सुरक्षित रहें।”
शुभांशु शुक्ला ने बताया कि गगनयान के पहले मानव मिशन के लिए चुने गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री बाध्य होंगे कि वे पृथ्वी की कक्षा में कम से कम एक हफ्ते तक टिक सकें। इस दौरान पृथ्वी से आने वाले तापमान का उतार-चढ़ाव और विकिरण का स्तर लगातार मॉनिटर किया जाएगा, ताकि समय-समय पर आवश्यक बदलाव किए जा सकें।
इस बातचीत में वैज्ञानिकों ने गगनयान मिशन की मौजूदा तैयारियों के बारे में भी पीएम मोदी को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत तीन भारतीय एSTRonauts को 2026 के अंत तक पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा। तैयारी में शामिल इंजीनियरों, डॉक्टरों और प्रशिक्षकों ने मिलकर मानवयुक्त कक्षीय मॉड्यूल और क्रू कैप्सूल तैयार किए हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने शुभांशु शुक्ला और पूरी टीम को “कार्य में उत्कृष्टता” के लिए बधाई दी और कहा, “जब हम अंतरिक्ष में कदम रखेंगे, तो यह केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का विषय भी बनेगी।”