
Warning Board On Samosa:
सरकार अब खाने-पीने की चीजों में मौजूद शुगर और फैट की मात्रा को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रही है। इस सिलसिले में स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी केंद्रीय संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं कि ऐसी जगहों पर जहां लोग रोजाना खाना-पीना करते हैं — जैसे कि कैफेटेरिया, कैंटीन और सार्वजनिक फूड स्टॉल — वहां स्पष्ट रूप से एक ‘Warning Board’ लगाया जाए। इस बोर्ड पर लिखा होगा कि समोसा, जलेबी, लड्डू या गुलाब जामुन जैसी चीजों में कितनी चाशनी, शुगर या ट्रांस फैट मौजूद है।
सबसे खास बात यह है कि एम्स नागपुर के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है कि अब संस्थानों के कैफेटेरिया में इस तरह के Warning Board लगाए जाएंगे ताकि आम लोग इस बात से वाकिफ हो सकें कि वो जो खा रहे हैं, वो कितना सेहतमंद है या नहीं।
सरकार के नए आदेश के बारे में डिटेल
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि देशभर के केंद्रीय संस्थानों में मौजूद सभी भोजन स्थलों पर ऑयल और शुगर कंटेंट बोर्ड लगाना अब जरूरी होगा। इसका मकसद लोगों को यह जानकारी देना है कि उनका फेवरेट समोसा या पकौड़ा, स्वाद के साथ-साथ कितना फैट और शुगर भी परोस रहा है।
इन चेतावनी बोर्ड्स पर यह लिखा जाएगा कि इन खाद्य पदार्थों को बनाने में कौन-कौन से सामग्री इस्तेमाल हुई हैं — जैसे तेल, घी, मैदा, शुगर की मात्रा और तैयार करने की विधि। यह कदम खासतौर पर सार्वजनिक स्थानों और ऑफिस कैफेटेरिया में उठाया जा रहा है।
डॉक्टरों की क्या राय है?
कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (नागपुर शाखा) के अध्यक्ष डॉक्टर अमर आमले ने मीडिया से बातचीत में इस दिशा को एक बड़ी और अहम शुरुआत बताया। उनका कहना है कि अब खाने की चीज़ों पर लेबलिंग उतनी ही जरूरी हो जाएगी जितनी कि सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी होती है।
डॉ. आमले के मुताबिक आज के समय में शुगर और ट्रांस फैट शरीर के लिए उतने ही खतरनाक बन चुके हैं जितना कि तंबाकू। इसलिए जरूरी है कि लोग यह जानें कि वे क्या खा रहे हैं और उसमें क्या-क्या मिलाया गया है। इससे पब्लिक अवेयरनेस बढ़ेगी और लोग अपने खानपान को लेकर ज्यादा सतर्क हो सकेंगे।
ऐसे कदम की जरूरत क्यों पड़ी?
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारत में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2050 तक भारत की करीब 45% आबादी मोटापे से जूझ सकती है। यह आंकड़ा देश के लिए एक बड़ी चेतावनी है। इस ट्रेंड को देखते हुए सरकार अब प्रिवेंटिव हेल्थ स्ट्रैटेजी अपना रही है।
जानकारों का मानना है कि यह पहल किसी पर जबरन रोक लगाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य है जानकारी देना और जागरूक करना। इससे खाने की चीज़ों के बारे में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को एक जागरूक उपभोक्ता बनने में मदद मिलेगी।