
करीब 20 साल तक गोवा में रहकर विदेशियों को योग सिखाने वाले तरुण क्रांति अग्रवाल, जिन्हें लोग ‘योगी सोनू’ के नाम से जानते हैं, अब एक गंभीर आपराधिक मामले में फंस गए हैं। गोवा से लौटने के बाद वे अपने गांव डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में बस गए थे, जहां उन्होंने 5 एकड़ जमीन पर एक आश्रम की स्थापना की थी। लेकिन आश्रम में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अब उनका संत की छवि दागदार हो चुकी है।
पुलिस के अनुसार, 25 जून को की गई छापेमारी के दौरान आश्रम से लगभग 1.993 किलोग्राम गांजा, नशीले सीरिंज, टैबलेट्स और कुछ संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। साथ ही आश्रम में नाबालिगों की मौजूदगी को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि योग और मेडिटेशन के नाम पर यहां नशा सेवन कराया जाता था।
पुलिस ने बताया कि योगी सोनू खुद को ‘अंतरराष्ट्रीय योग गुरु’ बताते थे और दावा करते थे कि वे विदेशों में योग कैम्प्स करा चुके हैं। लेकिन जब अधिकारियों ने उनके दस्तावेज़ और NGO से जुड़े फंडिंग रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया, तो कई संदिग्ध आर्थिक लेन-देन सामने आए। आशंका है कि उनके संपर्क कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क से भी हो सकते हैं।
स्थानीय लोग हैरान हैं, क्योंकि वे उन्हें केवल एक शांत योग सिखाने वाले व्यक्ति के रूप में जानते थे। गांव में उन्होंने हाल ही में एक बड़ा आश्रम खोला था और लोगों को मेडिटेशन सत्र में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन अंदरूनी जांच में जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
फिलहाल आरोपी को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब आश्रम से जुड़े सभी लोगों और उनके संभावित विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है।